इश्क की चाहतें

Published on by Sharhade Intazar

अकेली शाम मिली है,

अकेली शाम मिली है,

शाम के गुजर जाने से पहले,
शाम से गुजर जाना चाहता हूँ,
चंद लम्हों में  तुझमे होकर,
तुझको ही पाना चाहता हूँ
है तेरे दीदार की हसरत मुझे
नज़रों को बताना चाहता हूँ,
तेरे आने की उम्मीद को लेकर,
इंतज़ार सजाना चाहता हूँ  

 
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