इंसानियत की चाबी

Published on by Sharhade Intazar

इंसानियत की चाबी

इंसानों की बस्तियां बसाने की खातिर,
में लिखता हूँ इंसानियत निभाने की खातिर,
ज़माने में जीते तो सभी हैं,
पर कुछ हैं जीते खुद को समझाने की खातिर

 

 
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