इश्क की नज़ाकत,

Published on by Sharhade Intazar

इश्क तेरी दास्ताँ अजब पायी गयी,गुलों से गुलों की डालियाँ सम्हाली गयी,

इश्क तेरी दास्ताँ अजब पायी गयी,गुलों से गुलों की डालियाँ सम्हाली गयी,

इश्क तेरी दास्ताँ अजब पायी गयी,
गुलों से गुलों की डालियाँ सम्हाली गयी,
जब प्यार आया निगाहों के दरम्याँ,
गले में बाँहों की मालाएं डाली गयी,
सुर्ख था रंग कहने को तो लहू का,
सुर्ख गुल से मगर प्यार की महक निकाली गयी

 

 
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