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  • (कुछ सांसें खुदाई के नाम )

    30 July 2015

    सूरज तेरे प्रकाश में हैं जीवन की सांसें, धरा में धड़कती हैं तेरे किरणों की सांसें , बादलों में कुछ तो है हवा तेरी सांसें ध्वनियों से जगती हैं दिलों की भी सांसें खुदा अश्क मेरे या तो तेरी दरियादिली पर ही बहते हैं, या फिर ये अश्क अपने नसीब की बेबसी पर ही...

  • सकूँ की नींद

    31 July 2015

    इंसानियत के नाम, इश्क में नींदों के उड़ जाने का सबब, मेहबूब के दीदार में खो जाने का सबब , इक नींद ही तो है उसके ख्वाब आने का सबब, भूख में सकूँ की नींद कब हासिल हुई, करवटों में रात कटती ही हासिल हुई , जुर्म के बाद की नींदों में सकूँ मिलता कहां है, जहन में...

  • इंसानियत की चाबी

    31 July 2015

    इंसानों की बस्तियां बसाने की खातिर, में लिखता हूँ इंसानियत निभाने की खातिर, ज़माने में जीते तो सभी हैं, पर कुछ हैं जीते खुद को समझाने की खातिर

  • मिटटी का खेल

    30 July 2015

    तूफ़ान भीतर का खेल कर मिटटी में मिटटी का खिलौना बना मैं, खेलती है मिटटी मुझसे किसका बिछौना बना मैं, नाम हुआ मोहब्बत का किसी दिल का कोना बना मैं, फिर मिल गया मिटटी में क्यूंकि मिटटी से ही था बना मैं मन को सुलाने और उठाने का हुनर गर आ जाये, जाने इंसान कितनी...

  • इश्क की चाहतें

    31 July 2015

    अकेली शाम मिली है, शाम के गुजर जाने से पहले, शाम से गुजर जाना चाहता हूँ, चंद लम्हों में तुझमे होकर, तुझको ही पाना चाहता हूँ है तेरे दीदार की हसरत मुझे नज़रों को बताना चाहता हूँ, तेरे आने की उम्मीद को लेकर, इंतज़ार सजाना चाहता हूँ

  • सुबह के उजालों से

    01 August 2015

    सुबह के उजालों ने जब दुआ मांगी, तेरे लिए खुशियां बेइंतहा मांगी, सूरज जब रौशनी है साथ लाया, अंधेरों ने छुपने को थी जगह मांगी, परिंदे ले आये पैगाम दिशाओं के, मंज़िलों ने तेरे क़दमों की आहटें वंहा मांगी

  • इश्क की नज़ाकत,

    01 August 2015

    इश्क तेरी दास्ताँ अजब पायी गयी,गुलों से गुलों की डालियाँ सम्हाली गयी, इश्क तेरी दास्ताँ अजब पायी गयी, गुलों से गुलों की डालियाँ सम्हाली गयी, जब प्यार आया निगाहों के दरम्याँ, गले में बाँहों की मालाएं डाली गयी, सुर्ख था रंग कहने को तो लहू का, सुर्ख गुल...

  • नज़दीकी फासले

    01 August 2015

    फासले रहें नज़दीकियां रहें, दिलों के बीच मगर कम दूरियां रहें, फासले रहें नज़दीकियां रहें दिलों के बीच मगर कम दूरियां रहें, खामोशियाँ हो सितारों सी, चांदनी तेरे लफ़्ज़ों सी, हर दम यंहा रहें , तन्हाईयाँ हो आसमा सी, महफ़िलें हों तेरी दास्ताँ सी, गुजर जाए वक़्त...

  • (अजनबी दोस्त अपने)

    02 August 2015

    (अजनबी दोस्त अपने)

  • Published from OverBlog

    02 August 2015

  • Ishk tujhe ibadat ki tarah manjoor jo kar le, Khuda ko milne ke liye majboor wo

    29 July 2015

    Ishk tujhe ibadat ki tarah manjoor jo kar le, Khuda ko milne ke liye majboor wo kar le