(कुछ सांसें खुदाई के नाम )

Published on by Sharhade Intazar

(कुछ सांसें खुदाई के नाम )

सूरज तेरे प्रकाश में हैं जीवन की सांसें,

धरा में धड़कती हैं तेरे किरणों की सांसें ,
बादलों में कुछ तो है हवा तेरी सांसें

ध्वनियों से जगती हैं दिलों की भी सांसें

खुदा अश्क मेरे या तो तेरी दरियादिली पर ही बहते हैं,
या फिर ये अश्क अपने नसीब की बेबसी पर ही बहते हैं,
जिस दिन आरजू तेरे दीदार की हदों से गुजर जाती है,
कहते है उस दिन से ये अश्क फकत तेरे और तेरे लिए
बहते हैं

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